आज 20 किमी की पदयात्रा करेंगे सोनम वांगचुक, कहा- ‘लद्दाख देश को बुला रहा…’

लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने और संविधान की छठी अनुसूची के तहत सुरक्षात्मक अधिकार प्रदान करने की मांग को लेकर प्रसिद्ध समाज सेवी व एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक बुधवार (23 सितंबर 2026) को 20 किलोमीटर लंबी पदयात्रा (Foot March) निकालने जा रहे हैं। वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर वीडियो संदेश साझा कर इस शांतिपूर्ण पदयात्रा की जानकारी दी और देशवासियों से लद्दाख की मांगों के समर्थन में खड़े होने की भावुक अपील की।

कारगिल युद्ध के नायकों को किया याद, 24 सितंबर को सर्व-धर्म प्रार्थना सभा

सोनम वांगचुक ने कारगिल के पास स्थित ‘श्याम वैली’ से संदेश जारी करते हुए इस महीने को शहीदों को समर्पित बताया:

  • सैनिकों और ग्रामीणों का योगदान: वांगचुक ने कहा कि यह वही क्षेत्र है जहाँ कारगिल युद्ध के दौरान न केवल वीर जवानों ने अपनी शहादत दी, बल्कि लद्दाख के स्थानीय नागरिकों ने भी बिना वर्दी पहने भारतीय सेना का कंधे से कंधा मिलाकर साथ दिया और देश की सीमाओं की रक्षा की।
  • पिछले साल हुई गोलीबारी के पीड़ितों को श्रद्धांजलि: उन्होंने बताया कि 24 सितंबर को लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन (LBA) की अगुवाई में एक सर्व-धर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन पिछले साल 24 सितंबर को हक और पर्यावरण की मांग के दौरान हुई अंधाधुंध गोलीबारी में जान गंवाने वाले 4+1 शहीदों की याद में किया जा रहा है।

न्यायिक जांच की रिपोर्ट और 1 करोड़ रुपये मुआवजे की मांग

वांगचुक ने केंद्र सरकार और स्थानीय प्रशासन के समक्ष शहीदों के सम्मान और मुआवजे को लेकर प्रमुख मांगें रखीं:

  • 15 लाख का मुआवजा अपमानजनक: सोनम वांगचुक ने कहा कि सरकार द्वारा पीड़ितों को दिया जाने वाला 15-15 लाख रुपये का मुआवजा बहुत कम और अपमानजनक है। उन्होंने सरकार से मांग की कि देश के अन्य हिस्सों की तर्ज पर लद्दाख के शहीदों के परिवारों को भी 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
  • न्यायिक जांच रिपोर्ट में तेजी: उन्होंने सरकार द्वारा बैठाई गई न्यायिक जांच (Judicial Inquiry) के परिणामों को जल्द से जल्द सार्वजनिक करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया।

‘लद्दाख देश को बुला रहा है’

सोशल मीडिया पोस्ट में भावुक संदेश लिखते हुए वांगचुक ने कहा:

“लद्दाख के लोग हमेशा निस्वार्थ भाव से देश के साथ खड़े रहे हैं, और अब समय आ गया है कि पूरा देश लद्दाख के अस्तित्व, संस्कृति और पर्यावरण को बचाने के लिए हमारे साथ खड़ा हो।”

23 सितंबर की इस ऐतिहासिक पदयात्रा में बड़ी संख्या में स्थानीय युवाओं के साथ-साथ देशभर के पत्रकारों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के शामिल होने की संभावना है, ताकि लद्दाख की आवाज को देश के कोने-कोने तक पहुँचाया जा सके।

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