इस्तीफा, गिरफ्तारी, जेल… CEC ज्ञानेश कुमार पर भड़का संपूर्ण विपक्ष, पढ़ें राहुल-ममता समेत 10 प्रमुख नेताओं के तीखे हमले

नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की स्पेशल इंसेंटिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया और आंतरिक फैसलों को लेकर सामने आई ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की खोजी रिपोर्ट के बाद देश की राजनीति में भूचाल आ गया है। चुनाव आयोग के भीतर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों (सुखबीर सिंह संधू व विवेक जोशी) के बीच 14 बार उभरे गंभीर मतभेदों की खबर सार्वजनिक होने के बाद पूरा विपक्ष हमलावर हो गया है।

कांग्रेस, टीएमसी, आप, सपा और एआईएमआईएम समेत तमाम विपक्षी दलों के शीर्ष नेताओं ने सीईसी ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, कानूनी कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की है।

क्या है विवाद? आयोग के भीतर 14 बार दर्ज हुई असहमति

अंग्रेजी समाचार पत्र की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 महीनों में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 14 बार विभिन्न फैसलों पर अपनी लिखित आपत्तियां दर्ज कराईं।

  • प्रमुख विवादित मुद्दे: नए मतदाताओं को जोड़ने में नियमों की कथित अनदेखी, मतदाता सूची का केंद्रीकृत नियंत्रण (Centralization), पश्चिम बंगाल के 34 लाख मतदाताओं से जुड़ा मामला और गोवा के 97 पात्र मतदाताओं को लिस्ट में शामिल न करने जैसे विषय शामिल हैं।
  • आयोग की सफाई: निर्वाचन आयोग ने सफाई देते हुए कहा है कि लोकतांत्रिक संस्था में विभिन्न विचारों का होना स्वाभाविक प्रक्रिया है और इसे आंतरिक टकराव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

विपक्ष के 10 बड़े नेताओं के तीखे प्रहार

  1. राहुल गांधी (कांग्रेस):“वोट की चोरी भारत के लोगों के खिलाफ एक क्राइम है और हमारे संविधान पर सीधा हमला है। इसे अंजाम देने वाले बीजेपी, आरएसएस और इलेक्शन कमीशन ने देशद्रोह का काम किया है। इसका इंसाफ जरूर होगा।”
  2. ममता बनर्जी (मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल):“मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। इस चुनावी धांधली और तानाशाही के खिलाफ पूरे देश में जन-आंदोलन चलाया जाएगा।”
  3. महुआ मोइत्रा (सांसद, टीएमसी):“ज्ञानेश ‘देशद्रोही’ कुमार की इतनी हिम्मत कि उन्होंने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से हलफनामा मांगा। अब जब सच साबित हो चुका है, तो ज्ञानेश देश से माफी मांगें और तुरंत इस्तीफा दें।”
  4. कपिल सिब्बल (वरिष्ठ अधिवक्ता व सांसद):“सुप्रीम कोर्ट को इस गंभीर अव्यवस्था और एकतरफा फैसलों का स्वतः संज्ञान (Suo Moto) लेना चाहिए तथा पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
  5. अखिलेश यादव (अध्यक्ष, सपा):“अगर चुनाव आयोग के भीतर से ही ऐसी खबरें आ रही हैं, तो यह भारतीय लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है। इससे चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान लग गया है।”
  6. अरविंद केजरीवाल (आम आदमी पार्टी):“हमारी स्पष्ट मांग है कि पिछले 3 वर्षों के दौरान वोटर लिस्ट में किए गए तमाम संदेहास्पद बदलावों को तुरंत रद्द किया जाए और 3 साल पुरानी वोटर लिस्ट को बहाल किया जाए।”
  7. असदुद्दीन ओवैसी (अध्यक्ष, AIMIM):“समय के साथ चुनाव आयोग से जनता का भरोसा कम हुआ है। जब आयोग के बहुसंख्यक सदस्य ही फैसले से असहमत थे, तो उन फैसलों की कानूनी और संवैधानिक वैधता पूरी तरह शून्य हो जाती है।”
  8. मनीष सिसोदिया (नेता, आप):“ज्ञानेश कुमार अब नैतिक आधार खो चुके हैं, उन्हें बिना एक पल गंवाए अपने पद से तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।”
  9. उद्धव ठाकरे (शिवसेना UBT):“लोकतंत्र में किसी एक व्यक्ति की तानाशाही या मनमानी नहीं चल सकती। संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता और निष्पक्षता हर हाल में बरकरार रहनी चाहिए।”
  10. योगेंद्र यादव (स्वराज इंडिया):“सवाल सिर्फ मतभेद का नहीं है। अगर दोनों चुनाव आयुक्त इन फैसलों को गैरकानूनी मानते थे, तो उन्होंने इसे रोकने के लिए क्या किया? सिर्फ चुपचाप विरोध दर्ज कराना काफी नहीं है, उनकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।”

बीजेपी का पलटवार

विपक्ष के चौतरफा हमलों पर भारतीय जनता पार्टी ने पलटवार करते हुए कहा है कि कांग्रेस और उसका गठबंधन चुनावी हार से बौखलाकर संवैधानिक संस्थाओं की साख गिराने का काम कर रहा है। भाजपा के अनुसार, किसी भी बहु-सदस्यीय संस्था में अलग-अलग राय होना लोकतंत्र की जीवंतता का प्रमाण है, न कि किसी संकट का संकेत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *