छात्रों की गूंज भ्रष्ट परीक्षा व्यवस्था का खामियाजा बच्चे भुगत रहेराहुल गांधी के भाषण की 5 बड़ी बातें

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में शनिवार (19 सितंबर 2026) को आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान कांग्रेस नेता व लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश की शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और बजट को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला। बिना किसी दलीय झंडे और बैनर के आयोजित इस विशाल छात्र संवाद सम्मेलन में राहुल गांधी ने आंकड़ों की मदद से मौजूदा व्यवस्था की कमियां उजागर कीं और कहा कि सरकारें अपनी मूल जिम्मेदारी से भाग रही हैं।

राहुल गांधी के भाषण के 5 मुख्य और बड़े अंश:

1. ‘पूरी व्यवस्था को रिवाइंड किया जा रहा, शिक्षा बजट 4.6% से घटकर 2.6% हुआ’

राहुल गांधी ने आंकड़ों की स्लाइड दिखाते हुए दावा किया कि वर्ष 2014 से पहले यूपीए सरकार के दौरान देश के कुल बजट का 4.6 प्रतिशत हिस्सा शिक्षा पर खर्च होता था, जो अब घटकर मात्र 2.6 प्रतिशत रह गया है। उन्होंने कहा कि देश में पहले आईआईटी और नए स्कूल-विश्वविद्यालय बनाए जाते थे, लेकिन अब पूरी व्यवस्था को पीछे धकेला जा रहा है। शिक्षा के हक का लगभग ₹7.7 लाख करोड़ रुपया आम छात्रों के बजाय गिने-चुने उद्योगपतियों (अंबानी-अडानी) के हाथों में सौंप दिया गया है।

2. ‘सिस्टम को सवाल पूछने वाले स्टूडेंट से खतरा, इसीलिए वह अंधभक्त चाहता है’

राहुल गांधी ने कहा कि आज का सिस्टम छात्रों से घबराता है क्योंकि छात्र सवाल पूछता है। छात्र पूछता है कि ‘अमित शाह के बेटे जय शाह क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन कैसे बन गए?’, ‘देश के पूरे बिजनेस को दो लोगों ने कैसे कैप्चर कर लिया?’ और ‘न्यायपालिका व चुनाव आयोग जैसी संस्थाएं निष्पक्ष काम क्यों नहीं कर रहीं?’ उन्होंने कहा कि इन्हीं तीखे सवालों से बचने के लिए सिस्टम छात्रों की जगह सवाल न पूछने वाले ‘अंधभक्तों’ को बढ़ावा देता है।

3. ‘स्टूडेंट मोहब्बत की बात करता है, अंधभक्त नफरत फैलाता है’

राहुल गांधी ने मंच से छात्र (Student) और अंधभक्त के बीच 5 बड़े बुनियादी अंतर गिनाए:

  • जिज्ञासा बनाम भ्रम: छात्र जिज्ञासु होकर सवाल पूछता है, जबकि अंधभक्त अपनी ही काल्पनिक दुनिया में रहता है।
  • प्यार बनाम नफरत: छात्र प्यार और सम्मान से बात करता है, जबकि अंधभक्त नफरत फैलाता है।
  • विनम्रता बनाम अहंकार: छात्र दूसरों की बात सुनता है, जबकि अंधभक्त अहंकार में रहता है।
  • निडरता बनाम डर: छात्र निडर होता है, जबकि अंधभक्त डरपोक होता है।
  • महिला सम्मान: छात्र महिलाओं की इज्जत करता है, जबकि अंधभक्त पितृसत्तात्मक सोच से महिलाओं का अपमान करता है।

4. ‘भ्रष्ट परीक्षा प्रणाली से सिस्टम पर भरोसा खत्म, छात्र बोले- हम हार चुके हैं’

व्यापमं और देश भर में हो रहे पेपर लीक पर बोलते हुए राहुल गांधी ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था के अंदर बैठे भ्रष्ट लोग पैसों के चक्कर में पेपर लीक कर लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद कर रहे हैं। संवाद के दौरान जब उन्होंने छात्रों से पूछा कि क्या उन्हें परीक्षाओं की पारदर्शिता पर भरोसा है, तो पांडाल से छात्रों ने एक सुर में कहा— “सर, हम इस सिस्टम से हार चुके हैं।” राहुल ने कहा कि यदि परीक्षा प्रणाली ही भ्रष्ट होगी, तो उसका सीधा नुकसान देश की युवा पीढ़ी को उठाना पड़ेगा।

5. ‘शिक्षा कोई लग्जरी नहीं, किंडरगार्टन से लेकर रोजगार तक देना सरकार का हक व फर्ज’

राहुल गांधी ने जोर देकर कहा कि छात्र ही किसी भी देश की वास्तविक नींव और भविष्य होते हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई लग्जरी (विलासिता) नहीं है, बल्कि यह हर नागरिक का मूलभूत अधिकार है। किंडरगार्टन से लेकर मिड-डे मील, स्कूल, कॉलेज की सस्ती पढ़ाई और उसके बाद सम्मानजनक रोजगार मुहैया कराना सरकार की प्राथमिक संवैधानिक जिम्मेदारी है, जिससे वह मुंह नहीं मोड़ सकती।

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