इंदौर में भड़कीं छात्राएं: बोलीं- ‘नेता-अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूल में क्यों नहीं पढ़ाते?’

इंदौर में आयोजित कांग्रेस सांसद व नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में शामिल हुईं छात्राओं और युवा युवतियों का गुस्सा शिक्षा के बाजारीकरण, कोचिंग माफिया, पेपर लीक और व्यवस्था में बैठे नेताओं के दोहरे रवैये पर जमकर फूटा। संवाद के दौरान छात्राओं ने महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और बदहाल सरकारी शिक्षा तंत्र पर बेबाकी से सवाल खड़े किए। छात्राओं ने साफ शब्दों में कहा कि जब तक देश के नेता, मंत्री और आईएएस-आईपीएस (कलेक्टर) अधिकारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ाएंगे, तब तक इन सरकारी संस्थानों की स्थिति कभी नहीं सुधर सकती।

कोचिंग माफिया हावी, शिक्षा बना व्यापार: जूही सोनी

कार्यक्रम में अपना पक्ष रखते हुए छात्रा जूही सोनी ने कहा कि देश भर में युवा नौकरियों की कमी और महंगी शिक्षा व्यवस्था से बेहद परेशान हैं।

  • कर्ज में माता-पिता: उन्होंने कहा, “आज शिक्षा को व्यापार बना दिया गया है। कोचिंग माफिया सरकारों के फैसलों को प्रभावित कर रहे हैं। लाखों रुपये फीस वसूलने के बावजूद लगातार पेपर लीक हो रहे हैं। सामान्य परिवार के माता-पिता कर्ज लेकर भी अपने बच्चों को ढंग से पढ़ा नहीं पा रहे हैं।”
  • विदेशों का उदाहरण: उन्होंने बताया कि कई देशों में छात्रों को निःशुल्क और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जाती है, जबकि हमारे देश में शिक्षा को कमाई का जरिया बना दिया गया है।

‘नेता अपने बच्चों को विदेश भेजते हैं और हमें रैलियों में बुलाते हैं’: पूर्णिमा मौर्य

छात्रा पूर्णिमा मौर्य ने व्यवस्था पर हमला बोलते हुए कहा कि लगातार मुद्दे उठाने के बाद भी जमीनी स्तर पर कोई ठोस परिणाम नजर नहीं आ रहे हैं।

“कलेक्टर और बड़े नेता अपने बच्चों को निजी या विदेशी बड़े स्कूलों में पढ़ाते हैं। वे खुद अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में क्यों नहीं भेजते? नेताओं के बच्चे कभी सड़कों पर रैलियों में शामिल नहीं होते, जबकि आम युवाओं को आंदोलनों और रैलियों में धकेला जाता है। आज युवा सालों की अनदेखी के बाद सड़कों पर उतरने को मजबूर हुआ है।”

कानून में समानता और सुधार की मांग

संवाद के दौरान अन्य छात्राओं ने भी कहा कि जब तक कानून सभी के लिए—चाहे वह नेता हो, अधिकारी हो या आम नागरिक—समान रूप से लागू नहीं होंगे, तब तक व्यवस्था में सुधार संभव नहीं है। महिला सुरक्षा और सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता को लेकर छात्राओं ने केंद्र और राज्य सरकार से तत्काल कड़े कदम उठाने की मांग की।

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