भटनवारा में आवारा मवेशियों का आतंक: धान की फसल बचाना हुआ मुश्किल, रतजगा करने को मजबूर किसान

सतना जिले के भटनवारा क्षेत्र में इन दिनों किसान आवारा और खुले में छोड़े गए मवेशियों के भारी आतंक से बेहद परेशान हैं। गांव के गैर-जिम्मेदार पशुपालक अपनी पालतू गायों का दूध निकालने के बाद उन्हें खुला छोड़ रहे हैं, जो खेतों में पहुंचकर किसानों की मेहनत पर पानी फेर रही हैं। खेतों में लहलहा रही धान की तैयार फसल को ये मवेशी चरकर पूरी तरह चौपट कर रहे हैं। इस समस्या के कारण स्थानीय किसानों का जीना मुहाल हो गया है और उन्हें अपनी फसल बचाने के लिए दिन-रात खेतों में कड़ा पहरा देना पड़ रहा है।

दूध निकालने के बाद गायों को खुला छोड़ रहे पशुपालक

भटनवारा के पीड़ित किसानों का आरोप है कि गांव के कई लोग अपने घरों में पली गायों को आवारा पशुओं की तरह सड़कों और खेतों में खुला चरने के लिए छोड़ देते हैं।

  • मेहनत पर फिर रहा पानी: किसान कड़ी धूप और बारिश में दिन-रात एक करके फसल तैयार करते हैं, लेकिन आवारा और पालतू मवेशियों का झुंड एक ही झटके में धान की खड़ी फसल को नष्ट कर देता है।
  • शिकायत पर विवाद: किसानों का कहना है कि जब वे संबंधित पशुपालकों से इस बात की शिकायत करते हैं, तो वे मानने के बजाय लड़ाई-झगड़े पर आमादा हो जाते हैं और गांव में विवाद की स्थिति निर्मित हो जाती है।

रतजगा करने को मजबूर किसान, फसल बचाने की जंग

गांव के किसानों ने बताया कि धान की फसल इस समय पककर तैयार होने की स्थिति में है, लेकिन मवेशियों के प्रकोप के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है:

लाठी और टॉर्च के सहारे गश्त: फसल को तबाही से बचाने के लिए किसानों को रात-रात भर जागकर खेतों में टॉर्च और लाठी लेकर पहरेदारी करनी पड़ रही है। इस निरंतर रतजगे और तनाव से किसानों का मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न हो रहा है।

प्रशासन और ग्राम पंचायत से सख्त कार्रवाई की मांग

अपनी गाढ़ी कमाई और मेहनत को आंखों के सामने बर्बाद होता देख किसानों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। भटनवारा के किसानों ने स्थानीय ग्राम पंचायत और सतना जिला प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाई है कि:

  1. पशुपालकों पर जुर्माना: खुले में मवेशी छोड़ने वाले लापरवाह पशुपालकों को चिह्नित कर उन पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई और जुर्माना लगाया जाए।
  2. गौशालाओं की व्यवस्था दुरुस्त हो: गांव के आसपास संचालित गौशालाओं की व्यवस्थाओं को सुधारा जाए और आवारा घूम रहे मवेशियों को तुरंत गौशालाओं में भिजवाने का प्रबंध किया जाए, ताकि किसानों की धान की फसल सुरक्षित रह सके।

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