मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले से राजनीति और सोशल मीडिया के टकराव की एक बेहद अजीब व सनसनीखेज तस्वीर सामने आई है। जिले में कथित संक्रामक बीमारियों के कारण हुई बच्चों की मौत के बाद पीड़ित आदिवासी परिवारों से मिलने पहुंचे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और कंटेंट क्रिएटर्स के एक समूह ने घेर लिया। इस दौरान ‘लाशों पर राजनीति’ करने का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी और तीखी बहस हुई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

पीड़ित परिवारों का हाल चाल जानने पहुंचे थे दीपके
जानकारी के मुताबिक, सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके शनिवार (12 सितंबर) को बालाघाट के बिरसा ब्लॉक अंतर्गत कुंडेकसा, बांदरी, आदोरी और कोरका गांवों के दौरे पर पहुंचे थे। इन दूरस्थ गांवों में हाल ही में कई मासूम बच्चों की असमय मौत हुई है। दीपके का मकसद प्रभावित आदिवासी परिवारों से संवेदना व्यक्त करने के साथ-साथ इलाके में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की जानकारी जुटाना था।
माइक लेकर कार के सामने आ धमकी महिला इंफ्लुएंसर, तीखी बहस
दौरे के दौरान सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स और यूट्यूबर का एक दल वहां पहुंच गया और उन्होंने दीपके की गाड़ी को घेर लिया। वायरल वीडियो में एक महिला इंफ्लुएंसर हाथ में माइक लेकर गाड़ी में बैठे अभिजीत दीपके से तीखे सवाल करती नजर आ रही है।
महिला ने आरोप लगाते हुए पूछा कि क्या वह यहां ‘लाशों पर राजनीति’ करने आए हैं और इतने दिनों बाद क्षेत्र की याद क्यों आई? हालांकि, दीपके वीडियो में देरी के लिए माफी मांगते दिखे, लेकिन जब माहौल गरमाने लगा और विरोध प्रदर्शन बढ़ा, तो सीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन्हें सुरक्षित दूसरी गाड़ी में बैठाकर वहां से रवाना किया। दीपके के जाते समय इंफ्लुएंसर्स की ओर से ‘भाग गया, भाग गया’ के नारे भी लगाए गए।
प्रायोजित विरोध की आशंका, पत्रकारों ने उठाए सवाल
इस अजीबोगरीब घटनाक्रम के बाद स्थानीय हलकों में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दूरदराज और बीहड़ आदिवासी गांव में अचानक इतनी बड़ी संख्या में बाहर से आए इंफ्लुएंसर्स की मौजूदगी पर स्थानीय पत्रकारों ने भी हैरानी जताई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि विपक्ष या नेताओं के दौरे में बाधा डालने और जमीनी मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए इस विरोध प्रदर्शन को किसी राजनीतिक शह पर प्रायोजित (Sponsored) कराया गया था।
बच्चों की मौत पर जबलपुर हाईकोर्ट सख्त
दूसरी ओर, बालाघाट के आदिवासी इलाकों में 30 से अधिक बच्चों की मौत का यह गंभीर मुद्दा अब कानूनी रूप ले चुका है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर पीठ के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया और न्यायमूर्ति प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग और बालाघाट कलेक्टर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि क्षेत्र में इलाज के अभाव में मासूम दम तोड़ रहे हैं और महज 50 बेड वाले अस्पताल में 400 से अधिक बीमार बच्चों का इलाज जैसे-तैसे चल रहा है।
प्रांशु विश्वकर्मा मध्य प्रदेश के सतना जिले के युवा ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर, कंटेंट राइटर हैं। पिछले 4 वर्षों से वे क्षेत्रीय डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। बिजनेस, रोजगार, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रभावशाली अंदाज़ में प्रस्तुत करने के साथ-साथ वे प्रोफेशनल न्यूज़ ग्राफिक्स, वीडियो एडिटिंग और सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वे Satna Times, Udghosh Samay News, Prabha Superfast, state break News जैसे डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े रहे हैं।
