मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में कथित संक्रामक बीमारियों और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव से 30 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौत का मामला अब बड़े राजनीतिक विवाद का रूप ले चुका है। शनिवार (12 सितंबर) को बालाघाट के प्रभावित आदिवासी गांवों का दौरा करने के ठीक अगले दिन, रविवार (13 सितंबर) को कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने सूबे की राजनीति में भारी हलचल मचा दी है।

अभिजीत दीपके ने सोशल मीडिया पर खुद को ‘मध्य प्रदेश का मुख्यमंत्री’ बताते हुए एक सांकेतिक ‘त्यागपत्र’ शेयर किया है और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा प्रदेश की बीजेपी सरकार पर तीखा राजनीतिक तंज कसा है।
दीपके का व्यंग्यात्मक ‘त्यागपत्र’: “मेरा जमीर इजाजत नहीं देता”
अपने सांकेतिक इस्तीफे में अभिजीत दीपके ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के मुख्यमंत्रित्व पद का स्वांग रचते हुए लिखा, “मैं मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देता हूं। बालाघाट में 30 से ज्यादा आदिवासी बच्चों की मौत के बाद मेरा जमीर मुझे इस पद पर बने रहने की इजाजत नहीं देता। मुख्यमंत्री के तौर पर, मैं उन्हें समय पर जरूरी मेडिकल देखभाल और मदद न दे पाने की जिम्मेदारी स्वीकार करता हूं।”
उन्होंने तंज कसते हुए आगे लिखा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एमपी की जनता की सेवा करने का अवसर देने के लिए धन्यवाद, लेकिन बतौर प्रशासन हम पूरी तरह विफल साबित हुए हैं।
मुआवजे और संवेदनहीनता पर दागे गंभीर सवाल
दीपके ने अपने पोस्ट में राज्य सरकार की संवेदनहीनता पर प्रहार करते हुए लिखा:
- मुआवजे पर घेरा: “हमने शुरू में हर बच्चे के लिए ₹22 लाख मुआवजे का ऐलान किया, जिसे विरोध के बाद बढ़ाकर ₹24 लाख किया गया। क्या यही ₹24 लाख काफी होते अगर ये किसी मंत्री या विधायक के बच्चे होते? यह रवैया दिखाता है कि हमने आदिवासी बच्चों की जिंदगी को कितनी कम अहमियत दी है।”
- स्वास्थ्य और पेयजल संकट: “एक तरफ ‘हर घर नल योजना’ के दावे किए जाते हैं, वहीं बालाघाट के आदिवासी परिवार आज भी नदी-नालों का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य अधिकारियों की अब तक कोई उच्च स्तरीय जवाबदेही तय नहीं की गई।”
- शिक्षा की बदहाली: “बालाघाट के कई गांवों में स्कूल जानवरों के बाड़ों से भी बदतर हैं, जहां आंगनवाड़ी से 5वीं तक के 75 बच्चे एक ही कमरे में पढ़ने को विवश हैं।”
आंकड़ों के जरिए बीजेपी सरकार के 21 सालों पर साधा निशाना
सीजेपी प्रमुख ने अपने पत्र में राज्य सरकार के ही विभिन्न आंकड़ों का हवाला देते हुए प्रदेश में आदिवासियों की स्थिति पर सवाल उठाए:
- बिजली का अभाव: सरकारी आंकड़ों के अनुसार एमपी में 55,795 आदिवासी परिवार आज भी अंधेरे में जीने को मजबूर हैं।
- अपराध में बढ़त: एनसीआरबी (NCRB) के आंकड़ों के मुताबिक देश में आदिवासियों के खिलाफ होने वाले कुल अपराधों में से 32% मामले अकेले मध्य प्रदेश में दर्ज हैं।
- कुपोषण की विभीषिका: राज्य में 5.41 लाख से ज्यादा बच्चे कम वजन के हैं और विधानसभा में पेश आंकड़ों के अनुसार 1.36 लाख से अधिक बच्चे गंभीर कुपोषण का शिकार हैं।
अभिजीत दीपके के इस अनूठे और तीखे राजनीतिक तंज के बाद मध्य प्रदेश का राजनीतिक पारा चढ़ गया है। एक तरफ जहां विपक्ष सरकार को घेर रहा है, वहीं दूसरी तरफ बीजेपी खेमे में इस सांकेतिक पत्र को लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखी जा रही है।
प्रांशु विश्वकर्मा मध्य प्रदेश के सतना जिले के युवा ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर, कंटेंट राइटर हैं। पिछले 4 वर्षों से वे क्षेत्रीय डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। बिजनेस, रोजगार, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रभावशाली अंदाज़ में प्रस्तुत करने के साथ-साथ वे प्रोफेशनल न्यूज़ ग्राफिक्स, वीडियो एडिटिंग और सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वे Satna Times, Udghosh Samay News, Prabha Superfast, state break News जैसे डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े रहे हैं।
