80 साल पुराने रास्ते पर ‘कांटेदार अड़ंगा 15 फीट जमीन के लिए महाभारत, JCB और पुलिस के सामने कब्जाधारियों ने किया बवाल; खाट पर अस्पताल पहुंचने को मजबूर बुजुर्ग

(मझौली, सीधी) एक तरफ सरकार ‘हर गांव पक्की सड़क’ का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ सीधी जिले के मझौली अंतर्गत ग्राम पंचायत जमुआ नंबर 01 में महज 15 से 20 फीट जमीन के टुकड़े के कारण ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह बाधित है। करीब 80 साल पुराने ऐतिहासिक सार्वजनिक रास्ते पर ऐसा अड़ंगा लगा है कि पंचायत द्वारा बनाई गई 700 मीटर की चमचमाती सड़क का लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल पा रहा है और लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं।

बुलडोजर और पुलिस बल के सामने महिलाओं को आगे कर किया विरोध

मामले में उस वक्त हाई-वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला जब तहसीलदार, पटवारी और भारी पुलिस बल की मौजूदगी में जेसीबी (JCB) मशीन अतिक्रमण हटाने मौके पर पहुंची। प्रशासनिक कार्रवाई शुरू होते ही भू-स्वामी रामनिहोर विश्वकर्मा और उनके परिजनों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया।

  • प्रशासन से हाथापाई: जैसे ही बुलडोजर कार्रवाई के लिए आगे बढ़ा, परिजनों ने महिलाओं को आगे कर दिया और पुलिस-प्रशासनिक टीम से भिड़ गए।
  • सरपंच की मध्यस्थता विफल: मौके पर पहुंचीं ग्राम पंचायत सरपंच श्रीमती सुनैना पनिका ने समझाइश देते हुए ‘जमीन के बदले दूसरी जमीन’ देने का सरकारी प्रस्ताव भी रखा, लेकिन भू-स्वामी के विरोध के आगे प्रशासनिक कोशिशें बेअसर रहीं और अधिकारियों की टीम को बैरंग लौटना पड़ा।

कांटेदार तार, कीचड़ और खाट पर मरीज ले जाने की लाचारी

विवादित 15 से 20 फीट के हिस्से में कटीली झाड़ियां और कांटेदार तार बिछा दिए गए हैं। बारिश के दिनों में कच्चा रास्ता फिसलन और कीचड़ से भर जाता है, जिससे वाहन चालकों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है।

ग्रामीणों ने बताया कि 15 जनवरी 2026 को गांव की एक बुजुर्ग महिला की तबीयत बिगड़ने पर एम्बुलेंस घर तक नहीं पहुंच सकी थी, जिसके बाद परिजनों को उन्हें खाट (चारपाई) पर लादकर मुख्य मार्ग तक ले जाना पड़ा था।

BNSS 152 के तहत नोटिस, अनिवार्य भू-अर्जन की चेतावनी

मामले में बढ़ती जनसमस्या को देखते हुए एसडीएम (SDM) मझौली के निर्देश पर प्रशासन ने सख्त विधिक कदम उठाया है:

  1. 15 दिन का अल्टीमेटम: भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा 152 के तहत रामकरण कुशवाहा और रामनिहोर विश्वकर्मा को नोटिस जारी कर 15 दिनों के भीतर कब्जा हटाने का निर्देश दिया गया है।
  2. अदालत में जवाब तलब: अनावेदकों को सक्षम न्यायालय में उपस्थित होकर यह स्पष्ट करना होगा कि इस विवादित टुकड़े को स्थायी सार्वजनिक रास्ता क्यों न घोषित कर दिया जाए।
  3. अनिवार्य भू-अर्जन (Land Acquisition): राजस्व अमले को एक सप्ताह में स्थल पंचनामा और ट्रेस नक्शा तैयार करने के आदेश दिए गए हैं। यदि आपसी सहमति से रास्ता नहीं छोड़ा जाता है, तो शासन जमीन का अनिवार्य अधिग्रहण कर सख्त कार्रवाई करेगा।

पंचायत सचिव और स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि 700 मीटर सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। केवल इस छोटे से हिस्से के कारण पूरी आबादी परेशान है। जनहित को देखते हुए प्रशासन जल्द से जल्द अनिवार्य भू-अर्जन कर सड़क का निर्माण कार्य पूरा कराने की तैयारी कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *