15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक मूल्य के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने के NPCI के फैसले के बाद मर्चेंट्स और कारोबारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। इस फैसले की पृष्ठभूमि और इसके दीर्घकालिक फायदों को स्पष्ट करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपने आधिकारिक ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) हैंडल से एक विस्तृत पोस्ट साझा कर इस पूरे आर्थिक गणित और आवश्यकता को समझाया है।
RBI ने बताया: आखिर क्यों जरूरी है UPI पर MDR शुल्क?
रिजर्व बैंक के अनुसार, भारत में UPI अब एक विशाल डिजिटल बैंकिंग इंजन बन चुका है। इस डिजिटल इकोसिस्टम की मजबूती, तकनीकी निरंतरता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए MDR शुल्क लागू करना अत्यंत आवश्यक कदम है।
- तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर और सर्वर में निवेश:UPI वर्तमान में प्रति माह अरबों ट्रांजैक्शन प्रोसेस करता है। इतने विशाल स्तर पर डेटा ट्रांसफर, हाई-स्पीड सर्वर और बैंकिंग सॉफ्टवेयर को 24/7 बिना किसी रुकावट के चलाने के लिए भारी पूंजीगत लागत की आवश्यकता होती है।
- साइबर सुरक्षा और धोखाधड़ी से बचाव:MDR से प्राप्त राजस्व का उपयोग बैंकों और फिनटेक कंपनियों द्वारा एआई (AI) आधारित एंटी-फ्रॉड टूल, एडवांस डेटा एन्क्रिप्शन और मजबूत साइबर सुरक्षा नेटवर्क तैयार करने में किया जाएगा।
- सरकारी सब्सिडी पर निर्भरता कम करना: शून्य-शुल्क व्यवस्था के कारण बैंकिंग सिस्टम को दीर्घकालिक बजटीय अनिश्चितताओं का सामना करना पड़ता था। एक व्यावसायिक और आत्मनिर्भर मॉडल से फिनटेक क्षेत्र में नई तकनीकों और स्टार्टअप्स को बढ़ावा मिलेगा।
- नेटवर्क का विस्तार: MDR से प्राप्त राशि का उपयोग देश के दूर-दराज, ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों (Tier 3 to Tier 6) में डिजिटल पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने के लिए किया जाएगा।
आम ग्राहकों पर क्या पड़ेगा असर?
रिजर्व बैंक और वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आम उपभोक्ताओं के लिए UPI 100% मुफ़्त रहेगा।
- P2P ट्रांसफर पूर्णतः निशुल्क:किसी मित्र, रिश्तेदार या एक खाते से दूसरे खाते में पैसे भेजने (Person-to-Person) पर कोई शुल्क नहीं लगेगा, चाहे रकम कितनी भी हो।
- क्यूआर कोड स्कैनिंग पर कोई शुल्क नहीं: ग्राहक जब किसी भी दुकान पर स्कैन करके भुगतान करेंगे, तो उनसे ₹1 भी अतिरिक्त नहीं लिया जाएगा। मर्चेंट्स इसे ग्राहक पर पास-ऑन (पास-ऑन फीस) नहीं कर सकते।
- 95% ट्रांजैक्शन पहले जैसे फ्री:दैनिक जीवन के 95% से अधिक मर्चेंट पेमेंट ₹2,000 से कम के होते हैं, जिन पर मर्चेंट्स को भी शून्य शुल्क (Zero MDR) देना होगा।
मर्चेंट शुल्क का पूरा गणित (MDR Structure)
| भुगतान राशि (₹) | लागू MDR (%) | व्यापारी द्वारा देय शुल्क (₹) |
| ₹2,000 तक | 0.00% | ₹0 (पूर्णतः फ्री) |
| ₹3,000 | 0.40% | ₹12 |
| ₹50,000 | 0.40% | ₹200 |
| ₹75,000 या अधिक | कैपिंग (Max ₹300) | ₹300 |
(नोट: रेलवे, ईंधन, बीमा और सरकारी सेवाओं जैसे पतले मार्जिन वाले क्षेत्रों के लिए ₹2,000 से ऊपर भी मात्र ₹5 का फ्लैट MDR तय किया गया है)
प्रांशु विश्वकर्मा मध्य प्रदेश के सतना जिले के युवा ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर, कंटेंट राइटर हैं। पिछले 4 वर्षों से वे क्षेत्रीय डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। बिजनेस, रोजगार, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रभावशाली अंदाज़ में प्रस्तुत करने के साथ-साथ वे प्रोफेशनल न्यूज़ ग्राफिक्स, वीडियो एडिटिंग और सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वे Satna Times, Udghosh Samay News, Prabha Superfast, state break News जैसे डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े रहे हैं।
