CJP ने किया ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान का ऐलान नागपुर में बोले अभिजीत दीपके- ’80 सालों में नहीं बदला आदिवासी स्कूलों का हाल’

नागपुर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के राष्ट्रीय संयोजक अभिजीत दीपके ने बुधवार को महाराष्ट्र के नागपुर में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नए राष्ट्रव्यापी अभियान का ऐलान किया है। ‘स्कूल ठीक करो’ मुहिम की सफलता के बाद सीजेपी अब ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान की शुरुआत करने जा रही है। इस अभियान के तहत पार्टी की टीमें देश भर के सुदूर आदिवासी बहुल इलाकों में जाकर सरकारी व आश्रम शालाओं का जायजा लेंगी और वहां की जमीनी हकीकत उजागर करेंगी।

“आजादी के 80 साल बाद भी आदिवासी क्षेत्र उपेक्षित”

नागपुर में मीडिया को संबोधित करते हुए सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके ने कहा कि देश को आजाद हुए लगभग 80 साल बीत चुके हैं, लेकिन आदिवासी इलाकों के स्कूलों की स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया है।

उन्होंने सरकारों की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा:

“आदिवासी इलाकों के स्कूलों में न तो बुनियादी सुविधाएं हैं और न ही बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर। अलग-अलग सरकारों ने आदिवासियों को लगातार नजरअंदाज किया है। इसके लिए कोई एक राजनीतिक दल या सरकार नहीं, बल्कि आजादी के बाद से रही सभी सरकारें बराबर की जिम्मेदार हैं।”

एमपी के बालाघाट और महाराष्ट्र में बच्चों की मौतों का उठाया मुद्दा

अभिजीत दीपके ने मध्य प्रदेश के बालाघाट और महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों में हुई मासूम बच्चों की संदिग्ध मौतों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया।

  • महाराष्ट्र का आंकड़ा: दीपके ने दावा किया कि महाराष्ट्र में पिछले दो वर्षों में 590 से अधिक आदिवासी बच्चों की मौतें हुई हैं। यदि ऐसा आंकड़ा मुंबई जैसे बड़े शहरों से आता, तो देश भर में बवाल मच जाता।
  • मध्य प्रदेश (बालाघाट): हाल ही में बालाघाट पहुंचे दीपके ने कहा कि वहां आधिकारिक आंकड़ों में 30 से अधिक बच्चों की मौत दर्ज है, जबकि स्थानीय लोगों के अनुसार यह संख्या 100 से ऊपर है।

क्या है ‘आदिवासी स्कूल ठीक करो’ अभियान की रूपरेखा?

सीजेपी प्रमुख ने स्पष्ट किया कि गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, झारखंड, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे राज्यों में जहां आदिवासियों की बड़ी आबादी है, वहां पार्टी की विशेष टीमें पहुंचेंगी।

टीमों का मुख्य काम स्कूलों में शौचालय, पीने का पानी, शिक्षकों की उपलब्धता, मिड-डे मील की गुणवत्ता और कक्षाओं की स्थिति की जांच करना होगा। जांच के बाद रिपोर्ट तैयार कर संबंधित राज्य सरकारों व केंद्र सरकार से त्वरित सुधार की मांग की जाएगी।

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