सतना जिले की सिटी कोतवाली पुलिस ने ऑनलाइन साइबर फ्रॉड के गिरोहों को फर्जी सिम कार्ड मुहैया कराने वाले एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने एक ही फर्जी दस्तावेज के जरिए दर्जनों सिम कार्ड एक्टिवेट करने वाले आरोपी अजय कुमार नामदेव (22) को गिरफ्तार किया है। आरोपी इन फर्जी फिजिकल सिम को E-SIM में कन्वर्ट कर मध्य प्रदेश समेत देश के अन्य राज्यों में साइबर ठगों को बेचता था। पुलिस ने आरोपी को अदालत में पेश किया, जहां से उसे केंद्रीय जेल सतना भेज दिया गया है।

PHQ भोपाल से मिले इनपुट पर खुली पोल
सिटी कोतवाली थाना प्रभारी हेमंत शर्मा ने बताया कि 17 सितंबर को आजाक थाना प्रभारी अनिल मिश्रा ने राज्य साइबर सेल (पुलिस मुख्यालय भोपाल) से प्राप्त गोपनीय दस्तावेजों और संदिग्ध सिम नंबरों की पड़ताल शुरू की।
जांच के दौरान जब सिम धारकों के क्रेडेंशियल्स खंगाले गए, तो अजय कुमार नामदेव का नाम प्रमुखता से सामने आया। इसके बाद पुलिस टीम ने दबिश देकर आरोपी को दबोचा और कड़ाई से पूछताछ की।
2 साथियों के साथ चलाता था ‘E-SIM कन्वर्टर’ नेटवर्क
पुलिस पूछताछ में आरोपी अजय नामदेव ने खुलासा किया कि वह अपने दो अन्य साथियों—रजनीकांत साकेत और अखिलेश सतनामी के साथ मिलकर इस संगठित अपराध को अंजाम देता था।
ठगी का तरीका (Modus Operandi):
- फर्जी सिम जेनरेशन: एक ही पहचान पत्र/दस्तावेज का दुरुपयोग कर कूटरचित तरीके से दर्जनों मोबाइल सिम चालू की जाती थीं।
- E-SIM में परिवर्तन: पकड़े जाने से बचने के लिए इन फिजिकल सिम को डिजिटल E-SIM में कन्वर्ट किया जाता था।
- साइबर गैंग्स को सप्लाई: इन E-SIM के QR कोड्स और क्रेडेंशियल्स को अंतरराज्यीय साइबर अपराधियों को बेचा जाता था, जिनका उपयोग देश भर में लोगों के बैंक खातों से ऑनलाइन ठगी करने में होता था।
मोबाइल जब्त, पुलिस तलाश रही अन्य कड़ियां
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी अजय नामदेव के कब्जे से वारदात में इस्तेमाल मोबाइल फोन जब्त कर लिया है। पुलिस अब मोबाइल के डिजिटल डेटा की जांच कर यह पता लगा रही है कि अब तक कितनी फर्जी सिम तैयार की गईं और उन्हें किन-किन साइबर गिरोहों को सप्लाई किया गया। फरार साथी रजनीकांत साकेत और अखिलेश सतनामी की सरगर्मी से तलाश जारी है।
कानूनी कार्रवाई व दर्ज धाराएं
पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS), आईटी एक्ट और टेलीकॉम एक्ट के तहत गंभीर अपराध दर्ज किया है:
- BNS की धाराएं: 318(4) (धोखाधड़ी), 3(5) (समान नीयत से मिलकर अपराध करना)
- IT Act: धारा 66(C) (पहचान की चोरी/आईडेंटिटी थेफ्ट)
- Telecommunications Act: संबंधित प्रावधानों के अंतर्गत प्रकरण दर्ज।
प्रांशु विश्वकर्मा मध्य प्रदेश के सतना जिले के युवा ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर, कंटेंट राइटर हैं। पिछले 4 वर्षों से वे क्षेत्रीय डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। बिजनेस, रोजगार, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रभावशाली अंदाज़ में प्रस्तुत करने के साथ-साथ वे प्रोफेशनल न्यूज़ ग्राफिक्स, वीडियो एडिटिंग और सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वे Satna Times, Udghosh Samay News, Prabha Superfast, state break News जैसे डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े रहे हैं।
