मैहर में जंगली हाथी को पकड़ने का अभियान जारी: रेस्क्यू के लिए बुलाए 4 कुमकी हाथी, 150 वनकर्मी व विशेषज्ञ तैनात

मध्य प्रदेश के नए नवेले जिले मैहर के गोरसरी पहाड़ी क्षेत्र में पिछले कई दिनों से दहशत का कारण बने जंगली नर हाथी ई-5 (C4) को सुरक्षित पकड़ने का बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। शुक्रवार शाम तेज बारिश और फिसलन भरे पहाड़ी रास्तों के कारण स्थगित किया गया यह ऑपरेशन शनिवार को मौसम सामान्य होते ही दोबारा शुरू कर दिया गया है। हाथी को ट्रेंकुलाइज (बेहोश) कर सुरक्षित तरीके से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व भेजने के लिए प्रशासन ने पूरी ताकत झोंक दी है।

बांधवगढ़ से पहुंचे 4 प्रशिक्षित कुमकी हाथी

जंगली हाथी ई-5 को चारों तरफ से घेरकर नीचे लाने और काबू में करने के लिए बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से चार प्रशिक्षित ‘कुमकी’ हाथी बुलाए गए हैं।

  • कुमकी हाथियों के नाम: रामा, सूर्या, श्याम और लक्ष्मण।
  • रणनीति: दो कुमकी हाथी पहले ही मैहर पहुंच चुके थे, जबकि दो शुक्रवार को पहुंचे। चारों कुमकी हाथियों को गोरसरी पहाड़ पर पहुंचा दिया गया है। इनकी मदद से जंगली हाथी को घेरा जाएगा।

150 से अधिक जवानों का अमला व भारी मशीनें तैनात

रेस्क्यू टीम ने गोरसरी पहाड़ तक भारी वाहनों को ले जाने के लिए विशेष रूप से 1.5 किलोमीटर लंबा कच्चा रास्ता तैयार किया है।

  • बल व विशेषज्ञ: मैहर वनमंडल के 120 वनकर्मी और बांधवगढ़ से आई 30 वन्यजीव विशेषज्ञों व डॉक्टरों की टीम (कुल 150 लोग) मौके पर तैनात हैं।
  • तकनीकी संसाधन: ऑपरेशन के लिए 1 हाइड्रा, 1 क्रेन, 2 जेसीबी, 1 फायर ब्रिगेड, 2 एम्बुलेंस और 1 विशेष फ्लड-लाइट वाहन को गोरसरी पहाड़ी पर तैनात किया गया है।

13 दिनों से मचा रहा था उत्पात, मिली ट्रेंकुलाइज की मंजूरी

उल्लेखनीय है कि ई-5 हाथी 7-8 सितंबर की रात रामनगर सीमा से जिले में दाखिल हुआ था। पिछले 13 दिनों में उसने आसपास के ग्रामीण इलाकों में फसलों और मकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है।

लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए एलीफेंट एडवाइजरी कमेटी ने हाथी को बेहोश (ट्रेंकुलाइज) कर पकड़ने की अंतिम मंजूरी दे दी है। रेंजर शुभम खरे के अनुसार, डॉक्टरों की टीम हरी झंडी मिलते ही डार्ट से हाथी को बेहोश करेगी और फिर कुमकी हाथियों व क्रेन की मदद से उसे सुरक्षित बांधवगढ़ भेजा जाएगा।

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