सतना में मरीज को झोली-टाट में बांधकर ले गए ग्रामीण: डेढ़ किमी पैदल चलकर मिली एंबुलेंस, ग्रामीणों का दर्द- ‘हर आपात स्थिति में झोली ही सहारा’

सतना जिले के चित्रकूट नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत थरपहाड़ गांव में आजादी के सात दशक बाद भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव किस कदर बना हुआ है, इसकी एक बानगी शुक्रवार को देखने को मिली। गांव में सड़क न होने के कारण 28 वर्षीय गोरे सिंह की तबीयत बिगड़ने पर परिजनों और ग्रामीणों को उन्हें झोली-टाट में बांधकर कंधे के सहारे करीब डेढ़ किलोमीटर दूर मुख्य सड़क तक पैदल ले जाना पड़ा। कंधे पर मरीज को ढोने का यह दर्दनाक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक दावों की पोल खुल गई है।

उल्टी-दस्त से बिगड़ी तबीयत, लौटने में भी झोली ही बनी सहारा

जानकारी के अनुसार, थरपहाड़ निवासी गोरे सिंह को अचानक तेज उल्टी-दस्त होने लगे, जिससे उनकी हालत बेहद गंभीर और कमजोर हो गई। गांव तक पक्का रास्ता न होने की वजह से कोई भी वाहन (एंबुलेंस) गांव के अंदर नहीं पहुंच सका।

मजबूरी में ग्रामीणों ने लकड़ी और टाट की मदद से झोली बनाई और मरीज को उसमें बांधकर डेढ़ किलोमीटर का पथरीला व कच्चा रास्ता तय कर मुख्य मार्ग पहुंचे। वहां से 108 एंबुलेंस के जरिए उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। प्राथमिक उपचार और दवा मिलने के बाद जब गोरे सिंह को डिस्चार्ज किया गया, तो घर लौटते वक्त भी उन्हें दोबारा उसी तरह झोली में टांगकर घर तक लाना पड़ा।

बुजुर्गों, मरीजों और गर्भवती महिलाओं की एक ही नियति

स्थानीय निवासियों का कहना है कि थरपहाड़ गांव में सड़क न होना एक स्थायी मुसीबत बन चुका है।

  • आपात स्थिति में लाचारी: जब भी गांव में कोई बुजुर्ग, गंभीर मरीज या गर्भवती महिला बीमार पड़ती है, तो उन्हें मुख्य सड़क तक पहुंचाने का एकमात्र जरिया यही ‘झोली’ होती है।
  • बारिश में बदतर हालात: मानसून और बारिश के दिनों में यह कच्चा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है, जिससे पैदल चलना भी खतरे से खाली नहीं रहता।

टेंडर का दावा, पर धरातल पर काम शून्य

ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर वे कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के चक्कर काट चुके हैं। हर बार अधिकारियों द्वारा टेंडर जारी होने या भोपाल स्तर पर स्वीकृति पेंडिंग होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया जाता है।

आक्रोशित ग्रामीणों का कहना है कि टेंडर का दावा कागजों तक सीमित है; धरातल पर न तो अब तक ठेकेदार पहुंचा है और न ही सड़क का निर्माण कार्य शुरू हो सका है।

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