मेरठ देश-दुनिया में रिश्तों के कत्ल और धोखे का प्रतीक बन चुके मेरठ के बहुचर्चित ‘सौरभ राजपूत हत्या कांड’ (नीला ड्रम कांड) में मेरठ के जिला जज अरविन्द कुमार मिश्रा-द्वितीय की अदालत ने बुधवार को अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने तमाम सबूतों और गवाहों के आधार पर मृतक की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को सौरभ राजपूत की नृशंस हत्या का दोषी करार दिया है। अदालत दोनों दोषियों को 15 दिन बाद यानी 14 अक्टूबर 2026 को सजा सुनाएगी। कत्ल की इस खौफनाक और पेचीदा कहानी में अंधविश्वास, ड्रग्स की लत, फर्जी स्नैपचैट आईडी और बलि का खौफनाक सच छिपा हुआ है।

प्रेम विवाह से मर्चेंट नेवी तक का सफर… और ‘साहिल’ की एंट्री
पुलिस जांच और अदालती दस्तावेजों के अनुसार पूरा घटनाक्रम इस प्रकार है:
- 2016 का प्रेम विवाह: सौरभ राजपूत और मुस्कान रस्तोगी ने परिजनों के विरोध के बावजूद साल 2016 में लव मैरिज की थी। दोनों की एक छह साल की बेटी भी है। मर्चेंट नेवी में कार्यरत सौरभ अक्सर लंदन में रहता था और अपनी शादीशुदा जिंदगी को बचाने के लिए पूरी तरह समर्पित था।
- साहिल की एंट्री और ड्रग्स का खेल: 2019 के आसपास मुस्कान के बचपन के दोस्त साहिल शुक्ला की जिंदगी में दोबारा वापसी हुई। मर्चेंट नेवी में होने के कारण सौरभ ज्यादातर बाहर रहता था। इस दौरान साहिल ने मुस्कान को चरस और स्मैक जैसे घातक नशीले पदार्थों (ड्रग्स) की लत लगा दी, जिससे उनके अनैतिक संबंध और गहरे होते गए।
अंधविश्वास, एलियंस की पेंटिंग्स और फर्जी स्नैपचैट आईडी का मायाजाल
पुलिस तफ्तीश में साहिल की एक रहस्यमयी और सनसनीखेज दुनिया का खुलासा हुआ था:
- प्रेत-साधना का जुनून: साहिल के कमरे से एलियन और अजीबोगरीब आकृतियों की पेंटिंग्स मिली थीं, जिन पर सांकेतिक वाक्य लिखे थे। साहिल आत्माओं, तंत्र-मंत्र और प्रेत-साधना पर गहरा विश्वास रखता था।
- नकली स्नैपचैट आईडी से ‘बलि’ का नाटक: चालाक मुस्कान ने साहिल के इस अंधविश्वास का फायदा उठाया। उसने एक नकली स्नैपचैट (Snapchat) आईडी बनाई और साहिल को यह झांसा दिया कि उसकी दिवंगत मां की आत्मा की शांति और मुक्ति के लिए सौरभ की ‘बलि’ देना बेहद जरूरी है।
नवंबर 2024 से रची गई साजिश: मांस काटने का चाकू, नींद की गोलियां और नीला ड्रम
मर्चेंट नेवी अफसर सौरभ की हत्या कोई अचानक हुआ हादसा नहीं, बल्कि महीनों की रेकी और ठंडे दिमाग से रची गई प्लानिंग थी:
- स्थानों की रेकी: नवंबर 2024 से ही मुस्कान और साहिल ने शव को ठिकाने लगाने के लिए ग्रामीण इलाकों और जानवरों को दफनाने वाले स्थानों की रेकी शुरू कर दी थी। आखिरकार उन्होंने शव को छिपाने के लिए ‘नीला ड्रम’ चुना।
- 22 फरवरी 2025 का घटनाक्रम: मुस्कान ने डिप्रेशन का बहाना बनाकर डॉक्टर से नींद की दवाइयां लिखवाईं और फिर पर्चे पर गूगल (Google) की मदद से अन्य तेज नशीली दवाओं के नाम बढ़ा दिए।
- कत्ल की तैयारी: आरोपियों ने ₹800 में मांस काटने के दो भारी चाकू, ₹300 में उस्तरा और पॉलीथीन बैग्स खरीदे थे।
14 अक्टूबर को सजा का ऐलान, पीड़ित मां बोलीं- ‘फांसी से कम मंजूर नहीं’
बुधवार को कोर्ट रूम में फैसला आते ही मृतक सौरभ की मां ने कहा कि दोनों दोषियों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए। इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और सोशल मीडिया पर ‘नीला ड्रम’ रिश्तों में बेवफाई का एक चर्चित सिंबल बन गया था। अब सभी की निगाहें 14 अक्टूबर को अदालत द्वारा दी जाने वाली सजा पर टिकी हैं।
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