नई दिल्ली भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की निष्पक्षता और मतदाता सूची प्रबंधन (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों के खुलासे के बाद देश की राजधानी में राजनीतिक पारा गरमा गया है। मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर शुक्रवार, 25 सितंबर को ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर नागरिक विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। प्रदर्शन को उग्र होता देख दिल्ली पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) ने सख्त रुख अपनाते हुए पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया और स्वराज अभियान के नेता योगेंद्र यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा समेत 40 से अधिक प्रमुख हस्तियों व प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।
बैरिकेडिंग पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों में धक्का-मुक्की
जंतर-मंतर पर आयोजित इस जनसभा में विपक्षी दलों के नेताओं, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भारी भीड़ जुटी थी:
- 150 मीटर पहले ही रोका: दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को मुख्य धरना स्थल तक नहीं जाने दिया और कार्यक्रम स्थल से करीब 150 मीटर पहले ही मजबूत बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया।
- बसों में भरकर ले गई पुलिस: बैरिकेड तोड़ने की कोशिश के दौरान पुलिस और छात्रों के बीच जमकर धक्का-मुक्की हुई। इसके बाद महिला पुलिसकर्मियों और जवानों ने एक-एक कर प्रदर्शनकारियों को बसों में भरना शुरू किया। दोपहर करीब 2:47 बजे तक पूरे इलाके को खाली करा लिया गया।
महुआ मोइत्रा और मनोज झा भी पहुंचे, CEC को बताया ‘अपराधी’
इस नागरिक विरोध प्रदर्शन में कई दिग्गज राजनीतिक चेहरे और सामाजिक कार्यकर्ता एकजुट हुए:
- महुआ मोइत्रा का तीखा हमला: तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद महुआ मोइत्रा भी प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचीं। हालांकि, पुलिसिया कार्रवाई से ठीक पहले वे मीडिया से रूबरू हुईं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें पद से हटाने और गिरफ्तार करने की मांग की।
- दिग्गज हस्तियों की मौजूदगी: प्रदर्शन में आरजेडी (RJD) सांसद प्रो. मनोज झा, भाकपा (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और नंदिता नारायण जैसी हस्तियां शामिल हुईं।
क्यों भड़का है विवाद?
AISA और विपक्षी दलों के नेताओं के अनुसार, ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की हालिया खोजी रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं:
- SIR प्रक्रिया में खामियां: सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने आरोप लगाया कि विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूचियों के प्रबंधन की प्रक्रिया बेहद पारदर्शीहीन और दोषपूर्ण तरीके से चलाई जा रही है।
- चुनावी प्रक्रिया पर सवाल: प्रदर्शनकारियों ने “ज्ञानेश कुमार को गिरफ्तार करो” के नारे लगाते हुए कहा कि लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा बचाने के लिए यह जनआंदोलन जरूरी हो गया है।
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