राजधानी दिल्ली के अति-संवेदनशील डीडीयू मार्ग (DDU Marg) पर उस समय सनसनी फैल गई और दिल्ली पुलिस समेत फॉरेंसिक टीम के होश उड़ गए, जब सड़क किनारे रखे एक पुराने बक्से से इंसानी कंकाल बरामद हुआ। हालांकि, घंटों की कड़ी जांच और फॉरेंसिक परीक्षण के बाद जो सच्चाई सामने आई, उसने पुलिस महकमे को राहत की सांस तो दी ही, साथ ही मामले की खूब चर्चा भी शुरू कर दी। जिसे हत्या का सबूत समझा जा रहा था, वह दरअसल स्कूल की साइंस लैब का प्लास्टिक मॉडल निकला।

झाड़ू लगाते समय एमसीडी कर्मचारी को मिला पुराना बक्सा
घटना डीडीयू मार्ग स्थित काली माता मंदिर के पास की है:
- सफाई के दौरान दिखा बक्सा: एमसीडी (MCD) के सफाई कर्मचारी इलाके में नियमित सफाई कर रहे थे। इसी दौरान उनकी झाड़ू एक पुराने लकड़ी के बक्से से टकराई।
- कंकाल देख मची अफरा-तफरी: उत्सुकतावश जब कर्मचारियों ने बक्सा खोला, तो उसके अंदर पूरा इंसानी कंकाल जैसा ढांचा नजर आया। यह देखते ही मौके पर हड़कंप मच गया और तुरंत दिल्ली पुलिस को सूचना दी गई।
- क्राइम और फॉरेंसिक टीम पहुंची: सूचना मिलते ही पुलिस की गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और इलाके की घेराबंदी कर दी गई। हत्या और किसी बड़ी साजिश की आशंका के चलते फॉरेंसिक और क्राइम टीम को तुरंत मौके पर बुलाया गया।
‘टक-टक’ की आवाज से खुला सच: जब फॉरेंसिक टीम ने ली चुटकी
मौके पर पहुंची फॉरेंसिक टीम ने जब बारीकी से बक्से और कथित कंकाल की जांच शुरू की, तो मामला संदिग्ध लगा:
- नहीं मिले खून के निशान: बक्से या कंकाल के आसपास न तो कोई खून का धब्बा था और न ही किसी जैविक अवशेष के सबूत।
- प्लास्टिक की निकली हड्डियां: असली ट्विस्ट तब आया जब एक फॉरेंसिक विशेषज्ञ ने हड्डी पर उंगली से थपकी दी। अंदर से ‘टक-टक’ की आवाज आई, जिसके बाद साफ हो गया कि यह कोई मानव अवशेष नहीं, बल्कि बायोलॉजी पढ़ाने में इस्तेमाल होने वाला पॉलिमर प्लास्टिक मॉडल है।
स्कूल के कबाड़ से सड़क तक कैसे पहुंचा नकली कंकाल?
मामले का खुलासा होने के बाद पुलिस ने आसपास के स्कूलों से संपर्क किया, जिससे पता चला कि:
- यह मॉडल माता सुंदरी रोड स्थित गवर्नमेंट बॉयज़ सीनियर सेकेंडरी स्कूल का था।
- स्कूल प्रिंसिपल के अनुसार, साल 2023 में स्कूल नई बिल्डिंग में शिफ्ट हो गया था। इसके बाद जुलाई 2026 में चलाए गए सफाई अभियान के तहत पुराने भवन के कबाड़ की नीलामी की गई थी।
- आशंका जताई जा रही है कि कबाड़ी ने उपयोगी सामान तो ले लिया, लेकिन इस पुराने साइंस मॉडल को लकड़ी के बक्से में बंद कर डीडीयू मार्ग पर लावारिस छोड़ दिया, जिससे पुलिस और फॉरेंसिक टीम को घंटों मशक्कत करनी पड़ी।
प्रांशु विश्वकर्मा मध्य प्रदेश के सतना जिले के युवा ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर, कंटेंट राइटर हैं। पिछले 4 वर्षों से वे क्षेत्रीय डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। बिजनेस, रोजगार, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रभावशाली अंदाज़ में प्रस्तुत करने के साथ-साथ वे प्रोफेशनल न्यूज़ ग्राफिक्स, वीडियो एडिटिंग और सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वे Satna Times, Udghosh Samay News, Prabha Superfast, state break News जैसे डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े रहे हैं।
