जबलपुर के श्रीराम इंस्टीट्यूट में 36 लाख का फीस घोटाला: फर्जी रसीदें थमाकर छात्रों के पैसे हड़पे; अकाउंटेंट चंद्रमोहन पर केस दर्ज

जबलपुर संस्कारधानी जबलपुर के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज ‘श्रीराम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी’ (SRIT) में छात्रों की फीस के नाम पर लाखों रुपये के बड़े वित्तीय घोटाले का भंडाफोड़ हुआ है। कॉलेज प्रबंधन की लिखित शिकायत के बाद थाना माढ़ोताल पुलिस ने संस्थान के मुख्य लेखाकार (अकाउंटेंट) चंद्रमोहन सिंह ठाकुर के खिलाफ जालसाजी, धोखाधड़ी, गबन और कूट रचित दस्तावेज तैयार करने का मामला दर्ज कर लिया है।

अधिकृत खाते की जगह अपने पर्सनल अकाउंट में मंगवाता था फीस

माढ़ोताल पुलिस को सौंपी गई शिकायत में कॉलेज के प्राचार्य शैलेष गुप्ता ने बताया कि आरोपी चंद्रमोहन सिंह ठाकुर वर्ष 2017 से श्रीराम इंस्टीट्यूट में लेखाकार के पद पर कार्यरत था। उसके पास छात्रों की फीस का हिसाब-किताब रखने, रिकॉर्ड मेंटेन करने और नो-ड्यूज (No Dues) सर्टिफिकेट जारी करने का प्रभार था।

कॉलेज प्रबंधन के सख्त निर्देश थे कि फीस केवल संस्थान के अधिकृत बैंक खाते में ही जमा होगी। किसी भी कर्मचारी को नकद राशि या व्यक्तिगत खाते में ट्रांजैक्शन लेने का अधिकार नहीं था। इसके बावजूद, आरोपी चंद्रमोहन ने वर्ष 2024 से शातिराना अंदाज में छात्रों की फीस कॉलेज के आधिकारिक खाते में न भिजवाकर खुद के निजी बैंक खातों में ट्रांसफर करानी शुरू कर दी।

14 छात्रों ने दी लिखित शिकायत, थमाई फर्जी रसीदें

जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी लेखाकार नकद फीस लेने के बाद छात्रों को कॉलेज की फर्जी व कूटरचित (Fake) रसीदें थमा देता था, जिससे छात्रों को उसकी चालाकी का अहसास नहीं होता था। मामला तब उजागर हुआ जब कॉलेज के 14 छात्रों ने लिखित में प्रमाण दिए कि उन्होंने अपनी फीस सीधे चंद्रमोहन को नकद और ऑनलाइन ट्रांसफर के माध्यम से दी थी।

गबन का आंकड़ा:

  • प्रत्यक्ष गबन: भुगतान रसीदों और साक्ष्यों के आधार पर वर्तमान में ₹17,82,148 के गबन की पुष्टि हो चुकी है।
  • संभावित गबन: खातों व अन्य शिकायतों के मिलान के बाद कुल घोटाला ₹36,81,730 (36.81 लाख रुपये) तक पहुंचने की आशंका जताई गई है।

जनवरी से फरार है आरोपी, पुलिस तलाश में जुटी

घोटाले की पोल खुलते ही आरोपी अकाउंटेंट चंद्रमोहन जनवरी 2026 से कॉलेज से अनुपस्थित है और फरार चल रहा है। माढ़ोताल पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है। पुलिस अब आरोपी के बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजैक्शन रिकॉर्ड और कॉलेज के नो-ड्यूज रजिस्टरों की गहन जांच कर रही है ताकि आरोपी की शीघ्र गिरफ्तारी की जा सके।

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