भोपाल मध्य प्रदेश में सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों से जुड़े आपराधिक मामलों को लेकर पुलिस मुख्यालय (PHQ) ने महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। नए निर्देशों के अनुसार, सरकारी सेवकों के खिलाफ आधिकारिक कामकाज से जुड़े कथित मामलों में अब आपराधिक कार्रवाई आगे बढ़ाने या मामला दर्ज करने से पहले शासन से पूर्व ‘अभियोजन स्वीकृति’ (Prosecution Sanction) लेना अनिवार्य होगा। पीएचक्यू ने प्रदेश की सभी पुलिस इकाइयों को इस व्यवस्था का कड़ाई से पालन करने के आदेश दिए हैं।

हाईकोर्ट के फैसले के बाद CID ने जारी किए निर्देश
पुलिस मुख्यालय का यह कदम मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ द्वारा 19 जुलाई 2026 को सुनाए गए एक फैसले के परिप्रेक्ष्य में आया है। कोर्ट ने एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ बिना अनिवार्य शासकीय मंजूरी के दर्ज शिकायत और उस पर निचली अदालत द्वारा लिए गए संज्ञान को निरस्त कर दिया था। इसके बाद अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने सभी पुलिस अधीक्षकों और थानों को कानूनी प्रावधानों का अनिवार्य रूप से पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश जारी किए।
BNSS की धारा 218 में अधिकारियों को सुरक्षा कवच
नए भारतीय आपराधिक कानून के तहत यह कानूनी संरक्षण प्रदान किया गया है:
- कानूनी प्रावधान: आधिकारिक कर्तव्यों के निष्पादन के दौरान हुए कथित अपराधों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 218 (पूर्ववर्ती CrPC की धारा 197) के तहत अदालत की कार्रवाई या प्राथमिकी से पहले सरकार की पूर्व अनुमति आवश्यक है।
- निजी मामलों में छूट नहीं: पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह संरक्षण केवल आधिकारिक ड्यूटी से जुड़े मामलों तक सीमित है। अधिकारियों के निजी कृत्यों, घरेलू विवादों या ऐसे अपराधों में जिनका पद और सरकारी काम से कोई संबंध नहीं है, पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं होगी और कार्रवाई पहले की तरह ही की जाएगी।
लोकायुक्त में मंजूरी के इंतजार में 295 मामले
एक तरफ जहां आधिकारिक कामकाज में सुरक्षा का प्रावधान सख्त किया गया है, वहीं दूसरी ओर भ्रष्टाचार निवारण मामलों में स्वीकृति की पेंडेंसी का बड़ा आंकड़ा सामने आया है। लोकायुक्त पुलिस के लगभग 295 प्रकरण ऐसे हैं, जिनमें आईएएस (IAS), आईपीएस (IPS) और राज्य सेवा के अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति का इंतजार है।
लंबित मामलों में सर्वाधिक 36 मामले नगरीय विकास एवं आवास विभाग के हैं। इसके अलावा पंचायत एवं ग्रामीण विकास के 15, स्वास्थ्य विभाग के 12, सामान्य प्रशासन विभाग के 11 और लोक निर्माण विभाग (PWD) के 10 प्रकरण लंबित हैं। अन्य निकायों व निगमों से जुड़े 166 मामलों में भी शासन स्तर पर निर्णय होना बाकी है, जिससे भ्रष्टाचार के मामलों की जांच गति प्रभावित हो रही है।
प्रांशु विश्वकर्मा मध्य प्रदेश के सतना जिले के युवा ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर, कंटेंट राइटर हैं। पिछले 4 वर्षों से वे क्षेत्रीय डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। बिजनेस, रोजगार, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रभावशाली अंदाज़ में प्रस्तुत करने के साथ-साथ वे प्रोफेशनल न्यूज़ ग्राफिक्स, वीडियो एडिटिंग और सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वे Satna Times, Udghosh Samay News, Prabha Superfast, state break News जैसे डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े रहे हैं।
