राजस्थान के कामां से मथुरा लाया जा रहा था 1000 किलो संदिग्ध पनीर: दस्तावेज नहीं दिखा सका कारोबारी, खाद्य विभाग ने कराया नष्ट

मथुरा आगामी त्योहारी सीजन को देखते हुए खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) ने मिलावटी और अमानक खाद्य पदार्थों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। मथुरा के कोसीकलां क्षेत्र में खाद्य विभाग की सचल दल टीम ने राजस्थान के कामां से बिक्री के लिए लाया जा रहा करीब 1,000 किलोग्राम संदिग्ध एवं अस्वच्छ पनीर पकड़ा। बाजार में इस पनीर की अनुमानित कीमत लगभग ₹2,20,000 बताई जा रही है। मौके पर पनीर अस्वास्थ्यकर पाए जाने के कारण अधिकारियों ने जनहित में इसे तुरंत नष्ट करवा दिया।

नंदगांव रोड पर घेराबंदी कर पकड़ी गई पिकअप

यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन, लखनऊ के आयुक्त और जिलाधिकारी मथुरा के सख्त निर्देशों के अनुपालन में की गई। सहायक आयुक्त (खाद्य) डॉ. जतिन कुमार सिंह के निर्देशन तथा कमलेश कुमार त्रिपाठी के नेतृत्व में सचल दल ने कोसीकलां थाना क्षेत्र अंतर्गत नंदगांव रोड स्थित जिंदल पुलिस चौकी के पास जांच अभियान चलाया।

टीम ने राजस्थान की सीमा से आ रही एक बोलेरो पिकअप (नंबर UP85ET6299) को रोककर जब तलाशी ली, तो उसमें भारी मात्रा में खुले में रखा पनीर मिला। वाहन मालिक व चालक अमर सिंह ने पूछताछ में स्वीकार किया कि यह पनीर कामां (राजस्थान) की एक स्थानीय डेयरी से मथुरा के बाजारों में सप्लाई करने के लिए लाया जा रहा था।

नहीं दिखा सके बिल, प्रथम दृष्टया अस्वच्छ मिलने पर किया नष्ट

कार्रवाई के दौरान जब खाद्य अधिकारियों ने पनीर के क्रय-विक्रय, ट्रांसपोर्टेशन और डेयरी से जुड़े वैध दस्तावेज मांगे, तो कारोबारी कोई भी अभिलेख प्रस्तुत करने में पूरी तरह नाकाम रहा। इसके बाद जब टीम ने पनीर की भौतिक जांच की, तो वह बेहद अस्वच्छ, दुर्गंधयुक्त और संदिग्ध अवस्था में पाया गया।

सार्वजनिक स्वास्थ्य से खिलवाड़ रोकने के लिए खाद्य विभाग की टीम ने त्वरित कदम उठाते हुए पूरे 1,000 किलो पनीर को मौके पर ही गड्ढा खुदवाकर नष्ट करा दिया, ताकि इसे बाजार में खपाया न जा सके।

सैंपल लैब भेजे गए, रिपोर्ट के आधार पर होगी कानूनी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने त्वरित विनष्टीकरण से पहले नियमानुसार पनीर के 2 नमूने (सैंपल्स) सील कर जांच के लिए राजकीय खाद्य विश्लेषण प्रयोगशाला (Government Food Lab) भेज दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि लैब रिपोर्ट आने के बाद मिलावट की वास्तविक स्थिति साफ होगी और उसी के आधार पर संबंधित कारोबारी व डेयरी संचालक के खिलाफ खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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