छिंदवाड़ा: अंतिम यात्रा भी मुश्किल! श्मशान तक रास्ता नहीं, कीचड़ में शव ले गए ग्रामीण

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में विकास के सरकारी दावों और जमीनी हकीकत की पोल खोलने वाली एक हृदयविदारक तस्वीर सामने आई है। बिछुआ जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पाथरी के बंधान माल गांव में मोक्षधाम (श्मशान घाट) तक पक्का रास्ता न होने के कारण ग्रामीणों को एक बुजुर्ग के शव को घुटनेभर कीचड़ और पानी से होकर ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

150 मीटर का दुर्गम रास्ता, घुटनेभर कीचड़ में निकली अंतिम यात्रा

जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक मामला 60 वर्षीय दिवंगत शिव पाटिल की अंतिम यात्रा के दौरान सामने आया। गांव से मोक्षधाम की दूरी लगभग एक किलोमीटर है, जिसमें करीब 150 मीटर का हिस्सा बेहद दुर्गम और कच्चे रास्ते में तब्दील हो चुका है।

बारिश के कारण मुख्य मार्ग से श्मशान घाट जाने वाला यह टुकड़ा दलदल और गहरे कीचड़ में बदल गया। परिजनों और ग्रामीणों ने भारी मशक्कत और जोखिम उठाकर किसी तरह पार्थिव देह को अंतिम संस्कार के लिए पहुंचाया।

पेंच टाइगर रिजर्व की एनओसी न मिलने से अटका निर्माण

पूरे घटनाक्रम का वीडियो वायरल होने और ग्रामीणों के आक्रोश के बाद प्रशासनिक अमला हरकत में आया। मामले पर बिछुआ जनपद पंचायत के सीईओ गौरव तिवारी ने बताया कि संबंधित क्षेत्र ‘पेंच टाइगर रिजर्व’ के बफर जोन के अंतर्गत आता है।

गांव से मोक्षधाम तक पक्की सड़क के निर्माण के लिए पेंच पार्क प्रशासन को लगभग छह महीने पहले प्रस्ताव भेजा जा चुका है। हालांकि, वन विभाग की ओर से स्वीकृति (NOC) न मिलने के कारण निर्माण कार्य अटका हुआ है।

प्रशासन का आश्वासन: स्वीकृति नहीं मिली तो बदला जाएगा श्मशान का स्थान

जनपद सीईओ ने आश्वासन दिया है कि यदि वन विभाग से शीघ्र अनुमति नहीं मिलती है, तो ग्रामीणों की समस्या को देखते हुए मोक्षधाम को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर स्थानांतरित किया जाएगा और वहां नए भवन व पहुंच मार्ग का निर्माण कराया जाएगा।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि वन विभाग के कड़े नियमों और पंचायत प्रशासन के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा ग्रामीणों को अपनों की अंतिम विदाई में भी भुगतना पड़ रहा है।

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