‘चुनाव आयोग ने देशद्रोह किया’: राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार और मोदी सरकार पर बोला तीखा हमला, विपक्ष लाएगा महाभियोग प्रस्ताव

नई दिल्ली देश की चुनावी प्रक्रिया और स्वायत्त संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर एक बार फिर देश की राजनीति गर्मा गई है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 24 सितंबर को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त (Chief Election Commissioner) ज्ञानेश कुमार और केंद्र की मोदी सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है। राहुल गांधी ने पावर पॉइंट प्रेजेंटेशन (PPT) के जरिए चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए उसे ‘डेमोक्रेसी का विनाशक’ करार दिया और CEC के तत्काल इस्तीफे की मांग की। इसी के साथ, विपक्षी दल (INDIA गठबंधन) मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव (Impeachment Motion) लाने की तैयारी कर रहे हैं।

‘पहले वोट चोरी, फिर कानून चोरी, फिर संस्था चोरी’: राहुल गांधी के मुख्य आरोप

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने दो चुनाव आयुक्तों की कथित आंतरिक आपत्तियों और मीडिया रिपोर्ट्स को आधार बनाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में निम्नलिखित बड़े दावे किए:

  • संविधान पर हमला: राहुल गांधी ने कहा, “चुनाव आयोग ने भारत के संविधान पर हमला किया है और देशद्रोह का काम किया है। पहले वोट चोरी हुई, फिर कानून चोरी हुआ और फिर संस्था चोरी कर ली गई।”
  • सभी हालिया चुनाव ‘फेक’: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि CEC ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में जितने भी चुनाव हुए हैं (जैसे बिहार, असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव), सब में धांधली और वोट चोरी हुई है।
  • धारा 16 (इम्युनिटी) पर सवाल: 2023 के ‘मुख्य चुनाव आयुक्त एवं अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम’ की धारा 16 के तहत चुनाव आयुक्तों को आधिकारिक फैसलों पर मिली सिविल और क्रिमिनल इम्युनिटी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि पीएम और गृह मंत्री द्वारा दी गई यह ‘सुरक्षा’ उन्हें बचा नहीं पाएगी।

गोवा SIR और 97 योग्य वोटर्स का मामला क्यों बना विवाद की वजह?

विवाद की सबसे मुख्य वजह गोवा में वोटर लिस्ट संशोधन (SIR) के दौरान सामने आई एक तकनीकी और प्रशासनिक गड़बड़ी है:

  1. सॉफ्टवेयर में ‘रोल बैक’ ऑप्शन का न होना: गोवा में जांच के बाद 97 योग्य वोटर्स के नाम गलती से कट गए थे। स्थानीय अधिकारियों (EROs) ने दस्तावेज सही पाए जाने पर उनके नाम वापस जोड़ने चाहे, लेकिन चुनाव आयोग के सॉफ्टवेयर ‘ECI Net’ में ‘रोल बैक’ (फैसला पलटने) का ऑप्शन नहीं दिया गया था।
  2. 8 ईमेल और सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अनदेखी: गोवा चुनाव दफ्तर ने 7 दिनों में 8 ईमेल भेजकर सेंट्रल आईटी टीम से सुविधा मांगी, लेकिन आयोग द्वारा कोई जवाब नहीं दिया गया। आरोप है कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद इस मामले को अनसुना कर दिया गया।

ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग की तैयारी

राहुल गांधी के इस हमले के बाद विपक्षी दल अब कानूनी और संसदीय प्रक्रिया के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग लाने का मसौदा तैयार कर रहे हैं:

  • संसदीय प्रक्रिया: महाभियोग का नोटिस देने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं। नोटिस स्वीकार होने पर जांच समिति बनती है और दोनों सदनों में दो-तिहाई (2/3) बहुमत से इसे पास कराना अनिवार्य होता है।

बीजेपी का पलटवार: ‘हार की बौखलाहट और ईर्ष्या’

राहुल गांधी और विपक्ष के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने भी कड़ा एतराज जताया है। भाजपा प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने पलटवार करते हुए कहा:

“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से ईर्ष्या और लगातार मिल रही चुनावी हार के कारण राहुल गांधी जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रहे हैं। चुनाव आयोग में सभी निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं और बहुमत के आधार पर मनमाने फैसले लेने का कोई सबूत नहीं है। राहुल गांधी संस्थाओं पर झूठे आरोप लगाकर देश का माहौल खराब कर रहे हैं।”

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