मध्य प्रदेश में नाबालिग बच्चियों की गुमशुदगी पर चौंकाने वाली रिपोर्ट: हर दिन औसतन 40 बेटियां हो रहीं गायब, इंदौर टॉप पर तो जबलपुर तीसरे नंबर पर

मध्य प्रदेश में नाबालिग बच्चियों के लापता होने के आंकड़ों ने एक बार फिर प्रशासनिक और सामाजिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस मुख्यालय (PHQ) की महिला सेल द्वारा जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में हर दिन औसतन 40 नाबालिग बच्चियां गायब हो रही हैं। साल 2026 के शुरुआती 8 महीनों (जनवरी से अगस्त) में ही गुमशुदगी के 9,760 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जो प्रदेश में बाल सुरक्षा की स्थिति पर खौफनाक तस्वीर पेश करते हैं।

PHQ आंकड़े: 12 हजार से अधिक मामलों में 3,303 बेटियां अब भी लापता

पुलिस फाइलों के अनुसार, पुराने लंबित मामलों को मिलाकर कुल 12,387 प्रकरण दर्ज थे:

  • रिकवरी रेट 93%: पुलिस ने राज्य और अंतरराज्यीय स्तर पर विशेष ऑपरेशन चलाकर 9,084 बच्चियों को सुरक्षित बरामद कर लिया है।
  • 3,303 मासूम अब भी दूर: सफलता के बावजूद 3,303 बेटियां अब भी पुलिस की पहुंच से दूर हैं। आंकड़ों से यह चौंकाने वाला खुलासा भी हुआ है कि गायब होने वाले बच्चों में लड़कियों की संख्या लड़कों से तीन गुना अधिक है।

टॉप-5 जिलों की स्थिति: इंदौर सबसे ऊपर, धार दूसरे और जबलपुर तीसरे नंबर पर

सितंबर 2026 तक दर्ज पेंडिंग (लंबित) मामलों के आधार पर प्रदेश के सबसे प्रभावित जिलों की सूची इस प्रकार है:

  1. इंदौर: 772 लंबित मामले (प्रदेश में शीर्ष स्थान पर)
  2. धार: 559 लंबित मामले
  3. जबलपुर: 504 लंबित मामले
  4. भोपाल: 493 लंबित मामले
  5. सागर: 439 लंबित मामले (रतलाम 417 मामलों के साथ छठवें स्थान पर)

5 सालों का ग्राफ और पुलिस की ‘A, B, C’ ग्रेडिंग व्यवस्था

गुमशुदा बच्चियों के पेंडिंग मामलों का पिछले 5 वर्षों का रिकॉर्ड दर्शाता है कि 2021 में 2,830, 2022 में 2,944, 2023 में 3,764 और 2024 में यह आंकड़ा 4,001 तक पहुंच गया था। साल 2025 में विशेष अभियानों के जरिए रिकॉर्ड 14,520 बच्चियों को ढूंढा गया था, जिससे पेंडिंग आंकड़े घटकर 2,627 रह गए थे, लेकिन 2026 में नए मामलों के कारण यह फिर से बढ़कर 3,303 हो गया है।

मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए PHQ ने जिलों की A, B, C ग्रेडिंग शुरू की है:

  • दूसरे राज्यों में पुलिस टीमें: राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली जैसे पड़ोसी राज्यों में एमपी पुलिस की विशेष टीमें डेरा डालकर बच्चियों की तलाश कर रही हैं।
  • DGP कर रहे वन-टू-वन समीक्षा: जिस जिले का प्रदर्शन असंतोषजनक (C ग्रेड) पाया जा रहा है, वहां के एसपी (SP) के साथ प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) खुद वन-टू-वन बैठक कर सख्त जवाब-तलब कर रहे हैं।

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