महाराष्ट्र में गणेशोत्सव के दौरान ढोल-ताशा पथकों की गूंज और सांस्कृतिक उल्लास का माहौल चरम पर रहता है। इस दौरान उत्सव के ढेरों वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते हैं, लेकिन हाल ही में पुणे से सामने आए एक वीडियो ने इंटरनेट पर एक नई बहस और आक्रोश को जन्म दे दिया है। वायरल वीडियो में एक महिला अपनी गोद में महज कुछ महीनों के मासूम बच्चे को कपड़े से बांधकर पूरे उत्साह के साथ भारी-भरकम ढोल बजाती हुई दिखाई दे रही है।
तेज शोर और भारी वाइब्रेशन के बीच असहाय दिखा मासूम
वायरल हो रहे इस वीडियो में जहां महिला अपने ढोल-ताशा वादन में मग्न नजर आ रही है, वहीं उसकी छाती से चिपका नन्हा बच्चा ढोल के भयंकर शोर, लाउड म्यूजिक और भारी वाइब्रेशन के बीच असहाय दिखाई दे रहा है। जैसे ही यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) और इंस्टाग्राम पर वायरल हुआ, लोगों की प्रतिक्रियाओं का सैलाब आ गया। इस कृत्य को देखने के बाद तारीफ करने वालों के मुकाबले मां की लापरवाही पर नाराजगी जताने वालों की संख्या बेहद ज्यादा है।
सक्षम दिखने की होड़ में बच्चे की सेहत से खिलवाड़: नेटिजन्स
वीडियो पर कमेंट करते हुए सोशल मीडिया यूजर्स और नेटिजन्स ने महिला को जमकर ट्रोल किया है। लोगों का कहना है कि खुद को ‘सक्षम महिला’ या आधुनिक मां साबित करने के लिए इतने छोटे बच्चे के स्वास्थ्य और सुरक्षा को जोखिम में डालना सरासर गलत है।
यूजर्स ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि एक जिम्मेदार मां होने के नाते महिला को कम से कम अपने मासूम बच्चे को ढोल-ताशे के इस कर्णकर्कश शोर से दूर रखना चाहिए था। कई लोगों ने आरोप लगाया कि रील्स और सोशल मीडिया पर प्रसिद्धि पाने के चक्कर में बच्चों की सुरक्षा को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
डॉक्टरों की चेतावनी: फट सकते हैं मासूम के कान के पर्दे
वीडियो पर कई विशेषज्ञों और यूजर्स ने बच्चे की सुनने की क्षमता को लेकर गहरी चिंता जाहिर की है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 0 से 3 साल तक के बच्चों के कान और दिमाग पूरी तरह से विकसित नहीं होते हैं। ढोल-ताशा पथक का साउंड लेवल खतरनाक रूप से बहुत ऊंचा होता है, जो शिशुओं के नाजुक कानों के लिए बेहद नुकसानदायक है।
एक यूजर ने चिंता जताते हुए लिखा कि इतने तेज शोर और ढोल की धमक से बच्चे के कान के पर्दे फट सकते हैं और वह हमेशा के लिए बहरा हो सकता है। नेटिजन्स का कहना है कि महिला सशक्तीकरण का असली अर्थ यह समझना है कि कब कहां मजबूत बनना है और कहां बच्चे की सुरक्षा को पहली प्राथमिकता देनी है।
प्रांशु विश्वकर्मा मध्य प्रदेश के सतना जिले के युवा ग्राफिक डिजाइनर, वीडियो एडिटर, कंटेंट राइटर हैं। पिछले 4 वर्षों से वे क्षेत्रीय डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। बिजनेस, रोजगार, राजनीति, सामाजिक मुद्दों और जनहित से जुड़ी खबरों को प्रभावशाली अंदाज़ में प्रस्तुत करने के साथ-साथ वे प्रोफेशनल न्यूज़ ग्राफिक्स, वीडियो एडिटिंग और सोशल मीडिया कंटेंट निर्माण में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वे Satna Times, Udghosh Samay News, Prabha Superfast, state break News जैसे डिजिटल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म से जुड़े रहे हैं।
