एकेएस के 42 माइनिंग स्टूडेंट्स भूमिगत खदानों,खुली और हाईवॉल माइनिंग की नवीनतम तकनीक से हुए परिचित। दो दिवसीय दौरे पर सोहागपुर क्षेत्र में जाना प्रायोगिक नियम।

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सतना। एकेएस के 42 माइनिंग स्टूडेंट्स ने 3 और 4 अप्रैल को भूमिगत खदानों,खुली खदानों और हाईवॉल माइनिंग की नवीनतम तकनीक की जानकारी प्राप्त करने का मौका प्राप्त किया।संपन्न हुए दो दिवसीय दौरे पर स्टूडेंट्स ने सोहागपुर क्षेत्र की खदानों का मुआयना किया और विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में समस्त तकनीक की विधिवत जानकारी प्राप्त की।इस बात की जानकारी देते हुए माइनिंग इंजीनियरिंग के सीनियर फैकल्टी प्रो.अनिल कुमार मित्तल ने बताया कि खनन विभाग के 40 छात्र और 2 छात्राएं वरिष्ठ फैकल्टी श्री जे.एन. सिंह के साथ दो दिवसीय दौरे पर सोहागपुर क्षेत्र की खदानों की जानकारी प्राप्त की। उन्हें बताया गया कि भूमिगत खदानों,भूमिगत खनन का उपयोग पृथ्वी की सतह के नीचे से अयस्क को सुरक्षित, किफायती और यथासंभव कम अपशिष्ट के साथ निकालने के लिए किया जाता है। सतह से भूमिगत खदान में प्रवेश एक क्षैतिज या ऊर्ध्वाधर सुरंग के माध्यम से हो सकता है, जिसे एडिट, शाफ्ट या डिक्लाइन के रूप में जाना जाता है। ओपन-पिट माइनिंग, जिसे ओपनकास्ट माइनिंग के नाम से भी जाना जाता है, एक सतही खनन तकनीक है जो जमीन में खुले गड्ढे से खनिज निकालती है।

ओपन-पिट माइनिंग दुनिया भर में खनिज खनन के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सबसे आम विधि है और इसके लिए निष्कर्षण विधियों या सुरंगों की आवश्यकता नहीं होती है। खुली खदानों की कार्यप्रणाली के बारे में भी बताया गया। उन्हें भारत में हाईवॉल माइनिंग की नवीनतम तकनीक के बारे में परिचित कराया गया। स्टूडेंट्स ने एसईसीएल के सर्वश्रेष्ठ रेस्क्यू स्टेशन का भी दौरा किया। विश्वविद्यालय के प्रो चांसलर अनंत कुमार सोनी, प्रो.ए.के. मित्तल, डीन डॉ.जी.के. प्रधान और एचओडी माइनिंग डॉ. बी.के. मिश्रा ने छात्रों के दौरे पर खुशी जाहिर करते हुए स्टूडेंट्स को अधिकतम सीखने की सलाह दी ।

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