रीवा में इलाज में लापरवाही के आरोपों के बीच दोबारा हुआ मृतका का पोस्टमार्टम, वीडियोग्राफी भी कराई गई

मध्य प्रदेश के रीवा स्थित विंध्य के सबसे बड़े संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय से एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है। सतना जिले के टिकुरिया टोला की निवासी अर्चना गुप्ता की इलाज के दौरान हुई मौत के बाद परिजनों के भारी विरोध और हंगामे को देखते हुए मंगलवार को शव का दोबारा पोस्टमार्टम कराया गया। परिजनों ने डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही और अनदेखी जैसे बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं।

सड़क हादसे के बाद कराया गया था भर्ती

प्राप्त जानकारी के अनुसार, सतना के टिकुरिया टोला निवासी अर्चना गुप्ता (पति राजकुमार गुप्ता) बीते 30 अगस्त को एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गई थीं। प्राथमिक उपचार के बाद सतना से उन्हें रीवा के संजय गांधी अस्पताल रेफर किया गया था। यहाँ आईसीयू में इलाज के दौरान सोमवार को उन्होंने दम तोड़ दिया।

परिजनों का आरोप- शरीर में पड़े कीड़े, स्टाफ ने की मारपीट

महिला की मौत के बाद परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए कहा कि सही देखभाल न होने से मरीज के शरीर में कीड़े पड़ गए थे। इसके अलावा, उन्होंने अस्पताल के स्टाफ पर मारपीट करने के भी संगीन आरोप लगाए।

सोमवार को पहली बार पोस्टमार्टम होने के बाद भी परिजन संतुष्ट नहीं हुए। उन्होंने इलाज में गड़बड़ी की आशंका जाहिर करते हुए पुनः पोस्टमार्टम कराने की मांग की और अस्पताल परिसर में ही धरने पर बैठ गए।

फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने किया दोबारा पोस्टमार्टम

परिजनों के बढ़ते दबाव और उग्र विरोध को देखते हुए प्रशासन की मौजूदगी में मंगलवार को मेडिकल कॉलेज के फॉरेंसिक विभाग की विशेषज्ञ टीम गठित की गई। टीम ने शव का दोबारा पोस्टमार्टम किया। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रहे, इसके लिए पोस्टमार्टम की पूरी वीडियोग्राफी भी कराई गई। प्रक्रिया संपन्न होने के बाद परिजन पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए प्रयागराज लेकर रवाना हो गए।

अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को बताया निराधार

दूसरी ओर, संजय गांधी अस्पताल प्रबंधन ने परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। प्रबंधन का कहना है कि मरीज की हालत शुरुआत से ही काफी नाजुक बनी हुई थी और उनका इलाज तय मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत ही किया जा रहा था। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, परिजनों की मानसिक संतुष्टि और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ही दोबारा पोस्टमार्टम की अनुमति दी गई थी।

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